साधना क्या है?
साधना मतलब अपने आप को परिपक्त करना या खुद को साधना। अब ये साधना कैसी भी हो सकती है। यह धार्मिक, शारीरिक, मानसिक, वैचारिक आदि कैसी भी हो सकती है। अब प्रश्न यह है कि इसे कैसे और कहा करे। कुछ लोगों का मानना है कि यह ऐकांत और शांत वातावरण में ही हो सकती है।पर क्या यह सचमुच सम्भव है?
मेरा मानना है कि साधना कही भी किसी भी परिस्थिति में की जा सकती है। क्योंकि कभी-कभी एकांत में हो कर भी हम वैचारिक रूप से भटक रहे होते है।
और कभी हज़ारों की भिड़ में भी हम अपना एकांत या अपना लक्ष्य पा सकते है। ठीक उसी तरह जैसे शस्त्र अभ्यास के दौरान अर्जुन को सिर्फ चिड़िया की आँख दिखी।
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निरंतर अभ्यास, अपने कार्य पर सम्पूर्ण विश्वास, लक्ष्य के प्रति केन्द्रित होना ही सच्ची साधना है।ज़रूरी नहीं कि साधक साधु के ही वेश में हो।
एक अध्यापक का अपने विषय पर पकड़ होना साधना है। एक ग्रहणी का ग्रह कार्य में कुशल होना साधना है।कार्यशैली कैसी भी हो, आपकी कार्य कुशलता ही आपकी साधना है।
आपकी अपनी लेखिका
✍️प्रभा (कनिका)
लिखती हूँ कुछ दिल से.....................

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