वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।
अब बात करते है ' बाँझन को पुत्र देत ' की ।
अब बाँझन को पुत्र देत से क्या अभिप्राय है?
बाँझन - साधारण भाषा में समझा जाए तो वह स्त्री जो बच्चे को जन्म नहीं दे सकती।
जाने क्यों पर ये शब्द मुझे बहुत नापसंद है। ये शब्द नकारात्मकता से भरा हुआ है।ये शब्द अपने आप में कुप्रथा है।इस शब्द का प्रयोग एक कुरीति है जो युगों-युगों से इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसका बहिष्कार करना बहुत ज़रूरी है।
ये कुरीति या कुप्रथा नारी के नारीत्व पर प्रश्नचिन्ह की तरह है।ये कुप्रथा नारी के शोषण की ज़िम्मेदार है।
क्या एक औरत सिर्फ़ बच्चे को जन्म देने से ही माँ हो सकती है?
मुझे लगता है की परमात्मा ने ममता, दया, प्रेम, उदारता मातृत्व आदि गुण हर स्त्री को उपहार स्वरूप दिए है।
- श्री गणेश माँ के गर्भाशय से उत्पन नहीं हुए, वह तो माँ के इच्छा पुत्र है।पर सारा जहान उन्हें गोरी पुत्र के नाम से बुलाता है।
- उसी प्रकार, श्री कृष्णा को जन्म तो देवकी जी ने दिया पर सारा जहान उन्हें यशोदा का लाल कह के बुलाता है।
जब परमात्मा खुद उदाहरण स्वरूप होकर ये बात समझा रहे है की माँ सिर्फ़ गर्भाशय से बच्चे को जन्म देने से ही नहीं बल्कि हम अपने ममता, दया, प्रेम, उदारता मातृत्व आदि गुणो से बनते है।
तो फिर ये कौन सा समाज है जो गौरी पुत्र गणेश और यशोदा के लाल की महिमा तो गाता है, पर उनके द्वारा दी गई सीख़ को समझने से इनकार करता है या असमर्थ है।
हैरानी की बात है की समाज की इसी छोटी सोच की बली औरतें चढ़ी हुई है।और उससे भी ज़्यादा हैरानी की बात तो ये है कि इस बली को चढ़ाने वालों में खुद औरतें ही शामिल है।
दरअसल हमारे समाज में पुत्र वंश को बढ़ाने वाला माना जाता है।में इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती।
पर ये चाह मानसिक तोर पर इतनी प्रबल हो जाती है की लोग सही और गलत की समझ तक खो बेठते है। ओर इसकी आड़ में, किसी भी प्रकार के हथकंडे अपनाने को तैयार हो जाते है। या यूँ कहे की वो साम, दंड, भेद हर तरह के हथकंडे अपनाने को तैयार हो जाते है। उनकी संवेदनशीलता जैसे मर जाती है।
पर इसका गहरा असर सिर्फ़ ओर सिर्फ़ एक औरत पर होता है। उसकी मानसिकता पर होता है। वह खुद पर ही प्रश्न चिन्ह लगा लेती है।
यहाँ परमात्मा यही समझाना चाहते है कि बाँझन होना कोई गुनाह नहीं है। परंतु अपने अंदर की माँ की ममता का गला घोट देना बुरा है।
"यदि आप जननी नहीं भी हो पर आपमें माँ का प्रेम है तो आप पूरे संसार की माँ बन सकती है"
- जैसे मैरी टेरेसा से मदर मैरी टेरेसा- तक का सफ़र उन्होंने सिर्फ़ अपनी नेकी, प्रेम, संवेदनशीलता, ममता आदि गुणों के बल पर ही हासिल किया।
सच में जब अक़्ल के अंधो को आँखे मिल जाएगी और उनके दिल और दिमाग का कोड़ मिट जाएँगे तो, हर बाँझन माँ कहलाएगी।
------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
नोट - 'निर्धन को माया' के बारे में मेरी नज़र से जानने के लिए जुड़े रहे मेरे साथ मेरे इस सफ़र में।





