आइए अब हम अपने अंतिम पड़ाव की और बड़ते है।
4. नज़रिया -
नज़रिया शब्द से हमारा अभिप्राय है किसी चीज़ के प्रति हमारी मानसिकता या दृष्टिकोण। अब प्रश्न ये उठता है कि किसी व्यक्ति के नज़रिया (मानसिकता या दृष्टिकोण) का आधार क्या होता है या इसका निर्माण कैसे होता है? हर व्यक्ति का चीजों को देखने सुनने या समझने का एक नज़रिया होता है।
जहाँ तक में समझती हूँ इसका (नज़रिया) निर्माण दो तरीक़े से होता है ।
1. एक वो जिसका निर्माण हम अपने जीवन अनुभवो के आधार पर बनाते है
- हमारा वो नज़रिया जो हमारे अपने अनुभवो, संस्कारो , और शिक्षा द्वारा बनता है।
- यह वो नज़रिया है जो हम दूसरों की बातें सुनकर बनाते है, जो पूर्णता उनके अनुभव के आधार पर है हमारे नही।
अब हम किस नज़रिये को अपनाते है यह पूर्णता हमारी परिस्थिति, अनुभव, हमारी सकारात्मक या नकारात्मक सोच पर निभर करता है।
सकारात्मक और नकारात्मक सोच या नज़रिए का प्रभाव (गॉसिप या गपशप पर)
- एक सकारात्मक व्यक्ति चाहे कैसी भी परिस्थिति मे हो वह अपनी आशावादी सोच के बल पल हर मुश्किल पड़ाव को पर कर लेता है। ठीक उसी तरह चाहे कोई कितनी भी नकारात्मक बात बताए पर सकारात्मक व्यक्ति अपनी समझ और आशवादी सोच के बल पर उसे समझता ही नही बल्कि उस बात के सकारात्मक पहलुओं पे ध्यान देकर नकारात्मक पहलुओं को नज़रंदाज़ कर देता है।
- दूसरी और एक नकारात्मक व्यक्ति चाहे कितनी भी बेहतरीन परिस्थिति में ही क्यों न हो उसकी नकारात्मक सोच ही उसके आड़ें आ जाती है।ठीक उसी तरह उस व्यक्ति को चाहे कितनी भी सकारात्मक बात बताई जाए वह उसे सिर्फ़ नकारात्मक पहलु को ही समझता है।
अभी कुछ ही दिन पहले मेने "गौर गोपाल दास जी "द्वारा लिखित पुस्तक "जीवन के अदभुत रहस्य" पड़ी जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया |उस पुस्तक मे गौर गोपाल दास जी द्वारा एक कहानी का जिक्र किया गया है जो मे आप सबके साथ साँझा करना चाहूँगी |
"यह कहानी एक नवविवाहित जोड़े की है जो की एक अच्छी कॉलोनी मे रहता था | किसी कारण से जो पत्नी थी वो अपने सामने वाली पड़ोसन को पसंद नहीं करती थी |
एक बार जब उसकी पड़ोसन कपड़े सुखाने बालकनी मे आई तो पत्नी ने अपनी खिड़की से बाहर देखते हुए अपने पति से कहा देखो हमारी पड़ोसन कितने गंदे कपड़े धोती है |
वह मुझसे बड़ी है और घर के काम भी नहीं जानती | इस तरीके से उसने कई बातें कहीं | इस सब के दौरान पति ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और मोन रहा |और फिर ये सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा |
कुछ सप्ताह के बाद पत्नी ने देखा की उसकी पड़ोसन फिर कपड़े सूखाने बालकनी में आई है। पर इस बार मामला बिलकुल बदल चुका था।
पत्नी हैरान होकर बोली तुमने देखा उसके कपड़े साफ़ हो गए है।आज ये कमाल कैसे हो गया। और उसने जाने कितनी बातें बना डाली।
अब उसका पति पहली बार बोला वो भी बिना बाहर देखे कि 'श्रीमती जी आपको मालूम है कि आज सुबह उठकर मेने अपनी खिड़कियों के शीशे धोकर साफ़ किए है'।"
आइए अब हम इसको और अच्छे से समझते है।
सकारात्मक या नकारात्मक सोच का उदगम स्थान (main source)
जहा तक में समझ पाई दरसल यह सारा खेल दिमाग का है। यदि हम मान ले की दिमाग हमारा घर है और घर से
बाहर देखने के लिए हम खिड़की का प्रयोग करते है। उसी तरह बाहर की दुनिया को देखने समझने के लिए भी हम अपने दिमाग की खिड़की का प्रयोग करते है।
अब यह खिड़की है क्या ?
मेरा मानना है कि सब खेल खिड़की का ही है। ये खिड़की ही हमारा नज़रिया है।
यदि हम किसी बात तो जाँचें परखे बिना ही यह मन ले की वह सही कह रहा है या अगर वह किसी दूसरे इंसान की बुराई कर रहा है और हम यह बात मान ले तो इसका मतलब यह है की हमने अपनी खिड़की बंद ली है। या हमारी खिड़की पर उस व्यक्ति की बातों या गपशप (gossip) की धूल जम गई है।
दरसल ज़्यादा कुछ नही, बस इस नज़रिया रूपी खिड़की को ही साफ़ करने की ज़रूरत है। यदि यह खिड़की साफ़ हो गई तो हम एक बेहतर समाज की रचना कर पायेंगे ।
यदि ऐसा नही हुआ तो यह आँधी हमारे पूरे समाज को गंदा और खोखला कर देगी।
हम सब इस धरा का भविष्य है। इस धरा को एक बेहतर स्थान बनाना ये हम सब की नैतिक ज़िम्मेदारी है।
हमें हमारा कीमती वक़्त चुगली करने, किसी का मज़ाक बनाने, किसी को (infierity कॉम्प्लेक्स) पेदा करने के लिए नही करना चाहिए।
हमें कोशिश करनी चाहिए की हम अपने विचारो, कार्य शमता का प्रयोग लोगों की भलाई के लिए करे। किसी के मन में आशा या सकरतमकता पेदा करने के लिए करे।
दूसरों के रास्तों पर चलने की बजाए हम अपना रास्ता खुद बनाए।
क्यों न हम सब इस धरा की भलाई के लिए एक ऐसे समाज की रचना करे जहा सभी लोग एक दूसरे से प्यार करे, एक दूसरे का समान करे, किसी के आत्मसमान को ठेस न पहुँचाए।
और जहाँ तक मुझ लगता है इस का सिर्फ़ एक ही उपाए है कि सब मिलकर इस गपशप (gossip)मंडली नामक आतंकवादी संगठन पर सर्गिकल स्ट्राइक कर दे।
इस बारे में आपका क्या विचार है ?
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नोट - में सभी की आभारी हूँ कि इस सफ़र में मेरे साथ जुड़े रहने के लिए। में आपके धेर्या की भी सहारना करती हूँ।तथा इस विषय के कुछ देर से समाप्त होने के लिए माफ़ी माँगती हूँ।
में आप सब से अनुरोध करती हूँ कि मेरे इस blogs के बारे में आपका क्या विचार है, पक्ष में या विपक्ष में कृपया करके comment box में comment करके बताए।
आपके विचार और आपकी सलाह मुझे बेहतर और कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित करेगी।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आपकी अपनी लेखिका
प्रभा (कनिका)
लिखती हूँ कुछ दिल से ............


