अपनी शोख अदाओ से जो कइयों के जीं चुराती हैं, वो जो मेनका और उर्वशी को भी मात दे जाती हैं, वो हैं गली की चार औरते......... दिनभर इधर से उधर भटकती है, इसकी उसकी बुराई करके अपना हाजमा दुरुस्त रखती हैं, हर दम पंचायती को तैयार हैं, वो हैं गली की चार औरते......... बड़े-बड़े पत्रकारिता के संस्थानों को जो मात देती हैं, वो हैं गली की चार औरते......... वो जो ख़बर निकलवाने और बताने में माहिर हैं, खुद ही में एक संस्थान हैं, वो हैं गली की चार औरते......... और फसने पर मुकर जाने में भी माहिर है वो हैं गली की चार औरते..... ✍️प्रभा (कनिका)
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