Friday, April 23, 2021

सामाजिक अभिशाप - गपशप (gossip) से सीख़ (Part - 2)




अब प्रश्न यह उठता है की बातचीत का स्तर कैसा हो?

  • यहाँ में एक बात कहना चाहूँगी बातचीत या वार्तालाप बहुत ज़रूरी है हमारे लिए। क्योंकि की वो ज़रिया है हमारे मन की बात और विचार साँझा करने का
  • इस धरा की संस्कृति और इतिहास का आधार है बातचीत।जिसके द्वारा विभिन देश, विभिन्न संस्कृति, भाषा, धर्म, जाति के लोग एक सूत्र में बंधकर ज्ञान का आदान-प्रदान करते है।

" किसी भी प्रकार की बातचीत जिसका हमारे या समाज के विकास में योगदान हो वह बेहतरीन है।"

बातचीत के द्वारा कभी कोई हानि नहीं होती, शर्त सिर्फ़ इतनी होती है की दो लोगों द्वारा की गई बातचीत दो लोगों के बीच में रहे और उसे गलत तरीक़े से दूसरों के सामने पेश न किया जाए।यानि उसका मूलस्वरूप न बदला जाए।

पर जब भी बातचीत का मक़सद किसी की मानसिकता, सामाजिकता या संवेदनाओं का हनन होगा, तब जो हानि होगी, वह क्रूरता की चरम सीमा होगी।

हमारे समाज की कई मुश्किलें जैसे अवसाद (depression), आत्महत्या (suiside) आदि , समाजिक चादर ओड़े ज़हरीली बातचीत का ही परिणाम है।

सचमुच बातचीत और गॉसिप की जो डोर होती है वो बहुत नाज़ुक होती है।हमारी बातचीत का स्तर कब इस हद तक गिर जाता है की किसी की प्रतिष्ठा को तार-तार कर देता है हमें पता ही नही चलता।

चलिए अब मेरे दूसरे प्रयोग की तरफ़ बड़ते है


    2.  प्रतिक्रिया न देना 

  •       सच कहूँ तो ये मेरे लिए यह एक चुनौती की तरह था क्यूँकि अमूमन मेरी प्रतिक्रिया बहुत जल्द प्रकट हो जाती है। इस मामले में मेरा मुझ पर बस नहीं चलता। पर सीखने के लिए तो सबकुछ करना पड़ता है।

इस प्रयोग के अंतर्गत जब भी कोई मुझसे कोई भी नकारात्मक बात साझा करता तो में उसे उसके मनमुताबिक़ उतर नही देती।में अपनी प्रतिक्रियाएँ अक्सर बहुत सरल कर लेती। मेरी कुछ पसंदीदा प्रतिक्रियाएँ है - बहुत बड़ीया, ठीक है, अच्छा आदि ।

यहाँ मुझे मेरे ही द्वारा लिखी कुछ पंक्तिया याद आती है -
                                
                                                    "सवाल अक्सर चुभते है
जब जवाब न हो,
ओर जवाब भी चुभते है
जब मनमुताबिक न हो..."

ये एक बहुत ही हैरान करने वाला अनुभव था। क्यूँकि आपकी सरल प्रतिक्रियाएँ उनके गॉसिप के व्यापार के लिए काफ़ी नहीं होती है। वो उनके लिए घाटे का सोदा होता है। क्योंकि आपकी प्रतिकिया जितनी ज़ोरदार होगी उसमें उतना ज़हर घोलने की सम्भावना ज़्यादा होगी।और उनके व्यापार में बढ़ोतरी होगी।

फिर उस ज़हर को आगे बाटा जाता है और ये सिलसिला यही यू ही आगे बड़ता चला जाता है।

सचमुच यह एक दलदल है।एक बार अगर आप इसमें फस गए तो बहुत ही मुश्किल है इसमें से निकल पाना ।पर यदि कोई वक्ति इन सबसे निकलना चाहता है या कोशिश करता है तो लोग उसे बहिष्कृत करना शुरू कर देते है।

लोगो  की सोच आपके प्रति नकारतमकता से भर जाती है। वो आपको घमंडी , असामाजिक जाने क्या क्या कहना शुरू कर देते है। 

यहाँ में कहना चाहूँगी की 'कभी-कभी अकेले रहना बहतेर होता है, नकारात्मक लोगों से' ।

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नोट - मेरे अगले प्रयोग के लिए जुड़े रहे मेरे साथ मेरे इस सफ़र में।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏

आपकी अपनी लेखिका 

प्रभा (कनिका)

लिखती हूँ कुछ दिल से ............

समाजिक अभिशाप - गपशप (gossip) से सीख़ Part - 1


जाने क्या पर कुछ समय से मुझे कुछ तंग कर रहा था। में समझ नहीं पा रही थी। मेने परमेश्वर से दुआ करी की वो मेरी सहायता करे। बहुत कोशिश करी। और फिर एक दिन परमेश्वर की कृपा हुई और मुझे मेरा उतर मिला।

वो था (gossip) गपशप या चुगली । 



जी हाँ, गपशप (gossip) मुझे परेशान करती है।मेरे ही नहीं मुझे लगता है कि वो हम सब के आस पास एक नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। जिसका असर न सिर्फ़ हमारी सोच, स्वभाव ,कार्य बल्कि हमारे पूरे वक्तित्व पर पड़ता है। 

में इस बात को नकार नहीं सकती की मेने कभी(gossip) गपशप नहीं करी। जी हाँ, में इसका हिस्सा रह चुकी हूँ।शायद आज भी हूँ। पर इससे सिख लेते हुए, कुछ प्रयोगों के ज़रिए इसको और लोगों की मानसिकता को समझने का प्रयास कर रही हूँ ।

(gossip) गपशप क्या है?

इसे समझने के लिए में प्रतिदिन कुछ नये प्रयोग करने लगी।

जिसमें मेरा पहला प्रयोग था 
  1. (gossip) गपशप को ना कहना।
  •  इसके अंतर्गत जब भी कोई मुझसे Gossip (गपशप) करने आता तो में सीधे-सीधे कहा देती की में

उस व्यक्ति के बारे में कोई बात नहीं करना चाहती जो इस इस वक्त यहाँ उपस्थित नहीं है।



तब मेने अनुभव किया कि लोगों का नज़रिए और बर्ताव दोनो में परिवर्तन हुआ मेरे प्रति।वो मेरे व्यवहार से अपने आप को बेइज्जत और बुरा महसूस करने लगे और मुझे बुरा।

और अगले ही दिन मुझे एक गजब का अनुभव हुआ।

जिस व्यक्ति को मेने मना कर दिया था वो दुबारा मेरे पास आया और उसने कहा कि में जनता हूँ कि तुम मुझे सुनना नहीं चाहते, तुम्हें ये सब पसंद नहीं पर में तुम्हें कैसे समझाऊ की मेरे सात बहुत बुरा हुआ है 

किसी भी तरीक़े से वो व्यक्ति मुझे मानाना चाहता था।

सच में लोग अपना तरीक़ा बदल लेते है पर आख़िर में एक ही चीज़ चाहते है (gossip) गपशप

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नोट - मेरे अगले प्रयोग के लिए साथ में जुड़े रहे।


🙏🙏🙏🙏🙏🙏

आपकी अपनी लेखिका 

प्रभा (कनिका)

लिखती हूँ कुछ दिल से ............


Friday, April 2, 2021

परमात्मा की सीख़ - सभ्य समाज की ओर (part - 3)

                                                  
                                                    वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।

                                                  निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।


अब बात करते है 'निर्धन को माया' की।

अब 'निर्धन को माया' से आपका क्या अभिप्राय है?

क्या वाक़ई में कोई निर्धन अचानक से धनवान हो सकता है?

ये हो सकता है।इस बात को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। परंतु मेरे मत अनुसार यहाँ बात पैसे की निर्धनता की हो ही नहीं रही। बल्कि यहाँ बात मन कि निर्धनता की हो रही है।

हमारे ही समाज के कुछ लोग धन और ऐश्वर्य युक्त होते हुए भी, अपने मन, आचरण, बुद्धि, कर्म आदि से निर्धन है।उनके पास सब कुछ है मन कि शांति, प्रेम ,दया आदि का अभाव है।

दूसरों को हीन भावना से देखना, किसी को कुछ न समझना आदि कुंठाओ से ग्रसित है।ये लोग दरअसल बुरे नहीं है, ये बीमार है और ये बीमारी इन्हें समाज से ही मिली है।

शायद इस बीमारी का इलाज कुछ हद तक सम्भव है।

जब अक़्ल के अंधो को आँखे मिल जाएगी और उनके दिल और दिमाग का कोड़ मिट जाएँगे और जब  हर बाँझन माँ कहलाएगी तो एक बेहतर समाज बनेगा तब इन निर्धनो को माया मिल जाएगी

सचमुच अगर हम अपना नज़रिया ज़रा सा बदल ले और परमात्मा द्वारा दी गई सीख को सही तरीक़े से समझे और अपने जीवन में उतार ले तो हम एक सभ्य समाज की नीव रख सकते है।

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नोट - मेने अब तक जो भी लिखा या कहाँ ये पूरी तरह से मेरे विचार है।हो सकता है की आप लोग इससे सहमत हो या न भी हो।

मेरे अभी तक के blogs  के बारे में आपका क्या विचार है, पक्ष में या विपक्ष में कृपया करके comment box में comment करके बताए।

आपके विचार और आपकी सलाह मुझे बेहतर और कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित करेगी।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏

आपकी अपनी लेखिका 

प्रभा (कनिका)

लिखती हूँ कुछ दिल से ............



भ्रूण हत्या (रेखा और उसका अंतरमन) part -4

आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद मेरे साथ मेरे इस सफ़र में जुड़े रहने के लिए। तो चलिए बड़ते है रेखा के अंतरमन के सफ़र में आगे....... रेखा ने आगे ...