मैंने कभी सोचा भी नही था की कभी इस विषय पर कुछ लिखूँगी। जीवन अनुभवों की लड़ी में कभी इस अनुभव को साँझा कर पाऊँगी या उसकी हिम्मत भी कर पाऊँगी।
जिन्होंने इस अनुभव को जिया जब उनके मुँह से उनका हाले दिल सुना तो ऐसा लगा की समाज में इस (भ्रूण हत्या) से बड़ी कोई बर्बरता नहीं है।और ये बर्बरता बुनियादी तौर पर समाज को खोखला कर रही है।
जो भी सुना, देखा और दिल की गहराइयों से महसूस किया आज आप सब के साथ साँझा करना चाहती हूँ।
सदा से इस बर्बरता के लिए आदमियों को ही दोषी ठहराया जाता है।पर जब ज़मीनी तौर पर देखा तो समझा और जाना की आदमी ही नही औरतें भी इस बर्बरता का हिस्सा है और शायद उनसे कही ज़्यादा।
बेशक हमारा समाज पुरुष प्रधान है इसमे कोई दो राय नहीं है।परंतु पुरुष प्रधान समाज की बुराइयों की आड़ में औरतों का एक वर्ग अपने गलत कर्मों को छुपाता रहा है।
अपनी महत्वकांशाओ, ज़रूरतों, दिखावों और कमियों के बीच इंसान कब हैवान में तब्दील हो गया उसे पता भी नहीं चला।
आइए अब इस विषय को और अच्छी तरह समझते है।
भ्रूण क्या है?
प्राणी के विकास की प्रारंभिक अवस्था को भ्रूण कहते है।
भ्रूण हत्या क्या है?
जब भ्रूण के विकसित होने से पहले ही उसे मार दिया जाता है तो उसे भ्रूण हत्या कहते है।
जहाँ तक मैंने देखा समाज में जब भी भ्रूण हत्या की बात होती है तो समाज कन्या भ्रूण हत्या की तरफ़ ही केंद्रित नज़र आता है।जो की वाकई चिंता का विषय है इसमें कोई दो राय नही।
पर आज समाज में एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो भ्रूण की हत्या लिंग के आधार पर नही करता।
बल्कि अपने गुन्हाओं, ज़रूरतों, हालातों, मजबूरियों की आड़ में करता है। तो कोई इज़्ज़त, शोहरत और महत्वकांशाओ की आड़ में करता है।और जिसकी तरफ शायद किसी का ध्यान भी नही जाता है।
कभी ये सब क़ानूनी और कभी गैर क़ानूनी तरीक़ों से किया जाता है।और ये सब आज से नहीं बल्कि प्राचीनकाल से होता आ रहा है।
जब मैं इस बारे में सोच रही थी तो मैंने अपनी समझ अनुसार अपने आसपास देखे, सुने और साँझा किये हुए अनुभवों के आधार पर इस (भ्रूण हत्या) के अनेक पहलुओं को देखा।
जब इस सबका कारण खोजने की प्रक्रिया में मैंने कई लोगों को सुना तो देखा कि अपनी ज़रूरत के हिसाब से सबके तर्क बदल जाते है। कोई इसे मजबूरी, कोई क़िस्मत बताता है, तो किसी ने इसे ज़रूरत बताया। तो किसी ने इस गुनाह के लिए ऐतिहासिक और पौराणिक तर्क दिए।
पर जहाँ तक मैं समझ पाई तो इसके कुछ प्रमुख कारण है -
- अनपड़ता
- निजी महत्वकांशा
- इंसानियत का लोप
- भावनात्मक एहसासों की कमी
- मशीनीकरण

भावपूर्ण 🙏🙏
ReplyDeleteJi shukriya ❤️🙏
DeleteRangkarmi_anuj👆
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteBahut bahut shukriya 🙏
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