तज़ुर्बाए जिंदगी का उपहार
मेरे लिखें को पड़ कर,
मेरी जिंदगी को पड़ने कि कोशिश न करना,
मेरे लिखें को पड़ कर,
मेरी गहराइयों को न तोलना ,
कि अभी तो बस लिखना शुरु किया है,
कि अभी तो दिल का बस आयने से दीदार हुआ है,
कि बेड़ियो में जकड़ा दिल अभी आज़ाद हुआ है,
एक उम्र भी कम पड़ जाएगी दिल को दिल की कहने में,
कि समुन्द्र से गहरी है गहराइयाँ इस दिल की,
कि दिल को बक्शिश है तज़ुर्बाए जिंदगी की,
कि तज़ुर्बाए जिंदगी मेरा दिल तेरा क़र्ज़दार है,
कि मेरा लिखना तेरा दिया उपहार है..........
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आपकी अपनी लेखिका
प्रभा (कनिका)
लिखती हूँ कुछ दिल से ............

Nice
ReplyDelete🙏शुक्रिया 🙏
ReplyDelete